(संजीव परसाई) पिपरिया के युवा स्वयं सेवी संगठन जय माता दी समिति, सांडिया
रोड को उनके पर्यावरण सुधार के प्रयासों के लिए प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया गया
है. उन्हें यह सम्मान विशेषकर नर्मदा नदी में ऊगने वाली जल कुम्भी या एजोला को
निर्मूल करने के लिए दिया गया है. भोपाल में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में
समिति को प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय द्वारा सम्मानित किया जाएगा. इस आलेख में
समिति के प्रयास की एक झलक प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है.
दम तोडती नदियों की संख्या
लगातार बढ़ाती जा रही हैं. शासन, प्रशासन और संगठन इन नदियों के पुनरुद्धार के लिए
कमर कसे हुए हैं, लेकिन ये सर्वविदित है कि बिना नागरिकों की सक्रीय भागीदारी के
इन नदियों का जीवन बचाना एक कठिन चुनौती है. मध्यप्रदेश वासी जीवनदायनी नर्मदा के
लिए अधिक चिंतित हैं. नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से अरब सागर तक तट पर बसे
शहरों, और कस्बों की जिम्मेदारी अत्यधिक बड़ी है. श्रद्धालुओं का जन सैलाब नर्मदा
नदी को पूजने के साथ प्रदुषण का भी प्रमुख कारण होता है. मानव जनित प्रदुषण के साथ
नर्मदा नदी में जलकुम्भी या एजोला की समस्या निरंतर बढती जा रही है. गत वर्ष साल
2017 में पिपरिया से सटे नर्मदा तट सांडिया पर इस भयावह प्रकोप को देखा गया. हालात
यह हो चले थे कि श्रद्धालुओं को अपनी माँ नर्मदे की चिंता सताने लगी. इस समस्या के
चलते जहाँ एक ओर घाट नर्मदा तट से दूर होते चले गए, जिससे श्रद्धालुओं को नर्मदा
स्नान एक दुष्कर काम लगने लगा वहीँ दूसरी ओर नर्मदा के प्रवाह से जीवन यापन करने
वाले लाखों लोगों की आजीविका भी प्रभावित होने लगी.
इस चुनौती की आहट पिपरिया
के एक युवा संगठन “जय माता दी समिति” तक भी पहुंची. समिति के प्रमुख संगठक श्री
संदीप शर्मा, ने इस चुनौती की अपने साथियों से चर्चा की, और देखते ही देखते 50 युवाओं
का हुजूम इस मुश्किल चुनौती से जूझने के लिए नर्मदा नदी में कूद पड़ा. गौरतलब है कि
न तो तब इन युवाओं के पास इस कार्य को करने का कोई तकनीकी अनुभव था न ही कोई
संसाधन ही मौजूद थे. इन युवाओं के पास बस अपनी नागरिक चेतना और दृढ़ इच्छा शक्ति ही
पहला और अंतिम साधन थी.
जैसा की हर काम में
सामाजिक चुनौतियां आती हैं, और शुरुआत में जन सहयोग सीमित रहता है, वो इनके साथ भी
हुआ. संदीप शर्मा कहते हैं “ जब हम इस काम को करने का बीड़ा उठा चुके थे, तब
स्थानीय लोगों ने हमसे कहा कि ये एक कठिन काम है, जिसके लिए एक बड़ी योजना बनानी
पड़ेगी.” बात सही थी की हमें योजना बनाना था, लेकिन योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन
में लगने वाला समय हमारे पास नहीं था. से हमने इसे बिना किसी पूर्व तैयारी के ही
करने का निर्णय लेना पड़ा.
जय माता दी समिति के
योद्धाओं ने अपने निजी संसाधनों से गैंती, फावड़े, टोकरे, रस्सियाँ आदि सामगी
इकठ्ठा की और जुट गए, माँ नर्मदा को बचाने में. कुछ दिनों बाद इस काम की आहात
स्थानीय मीडिया को मिली और उनके सहारे स्थानीय जन प्रतिनिधियों और प्रशासन को, लेकिन
तब तक शुरूआती मुसीबतें झेल कर इन युवाओं का हौंसला चट्टान की तरह मजबूत हो गया
था. साथी मनोज राठी कहते हैं – जब काम शुरू हुआ तो शुरूआती चुनौतियों और संसाधनों
की कमी के चलते कई बार हमारा हौसला टूटते टूटते बचा. बस हम सभी एक दुसरे को हिम्मत
बंधाते हुए काम में लगातार लगे रहे.
जय माता दी समिति ने
इस दौरान इन्टरनेट पर ब्लॉक लगाकर एजोला को निकालने की तकनीक की जानकारी प्राप्त की.
और 21 मार्च से 15 अप्रैल तक एक सघन अभियान चलाया और पिछले क्षेत्रों से बहकर आने
वाले एजोला को सांडिया में ही रोक दिया. इसका प्रभाव होशंगाबाद तक हुआ और सांडिया
से होशंगाबाद तक नर्मदा एजोला से मुक्त हो गयी. इस काम में प्रशासन और घाट निर्माण
समिति सांडिया, ग्राम पंचायत सांडिया, श्री साईं सेवा समिति आदि के साथ स्वयं सेवी
संगठनों, और आम नागरिकों ने भरपूर सहयोग किया.

